रामपुर के तीन दिवसीय दौरे पर आये पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता श्री मुख्तार अब्बास नकवी द्वारा आज पत्रकारों से बातचीत के मुख्य अंश:
रामपुर, पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता श्री मुख्तार अब्बास नकवी ने आज यहां कहा कि मतदाता सूची एस.आई.आर पर कुछ "डिफीटेड डपोरशंख" बिना परिश्रम परीक्षा मे पास होने के पाखंड में जुटे हैं, इनकी स्थिति उस परीक्षार्थी जैसी है जो बिना पढ़े प्रमोशन, बिना लिखे प्रमाण पत्र चाहता है और यदि फेल होगा तो "पेपर आउट ऑफ कोर्स" कहकर अपने नकारेपन और नाकामी का ठीकरा पेपर और परीक्षक पर फोड़ेगा।
आज शंकरपुर, रामपुर में एस.आई.आर के तहत अपना मतदाता शुद्धिकरण फॉर्म बी.एल.ओ को सौंपने के दौरान पत्रकारों से बातचीत में श्री नकवी ने कहा कि ऐसे डपोरशंखों को बी.ए, बी. कॉम, बी.एस.सी के बजाय, "बी.डी-बैचलर ऑफ डिफीट" की डिग्री मिलती है। जिसे टांग कर डायनेस्टी के डिफॉल्टर डपोरशंख (परिवारतंत्र के पराजित पराक्रमी) डिस्ट्रिक्टिव डिंग बाजी (हार की हताशा में हुड़दंगी तमाशे) में जुट जाते है, और "नाच न आए आंगन टेढ़ा" की कहावत चरितार्थ करते फिरते हैं।
श्री नकवी ने कहा कि बिहार चुनाव में एस.आई.आर और वोट चोरी की काल्पनिक कहानी पर "विदेशी मॉडल की एंट्री" भी सरकार में इनकी नो एंट्री, का दौर खत्म नहीं कर पाई। फिर भी जनतंत्र को परिवार तंत्र का बंधक बनाने के जुगाड़ में जुटे सामन्ती सूरमां, भय-भ्रम के भंवरजाल के जरिए बिना जनाधार के जागीरदारी की जंग में जुटे हैं। श्री नकवी ने कहा कि एस.आई.आर पर काल्पनिक कन्फ्यूजन की कॉन्सपिरेसी बिहार चुनाव में बुरी तरह पिट चुकी है-परास्त हो चुकी है, फिर भी कांग्रेस एंड कम्पनी पिटी पटकथा पर पाखण्डी प्रयोग में डटे हैं। एस.आई.आर निरंतर चलने वाली संवैधानिक, लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, जिसके जरिए वैद्य वोटर की सुरक्षा, अवैध वोटर की समीक्षा-सफाई की जाती है। कुछ राजनीतिक दल इस संवैधानिक प्रक्रिया पर सांप्रदायिक प्रतिक्रिया के जरिए भटकाने, भरमाने, डराने, धमकाने की आपराधिक अराजकता में लगे हुए हैं।
श्री नकवी ने आगे कहा कि "आधुनिक शिक्षा के संस्थान (कैंपस) में आतंकवादी दीक्षा के संस्कार (कोर्स)" की कुछ गिनी चुनी घटनाओं के आधार पर अन्य शिक्षण संस्थानों पर शक करना ठीक नहीं है।
श्री नकवी ने कहा कि टेक्नोलॉजी और टेररिज्म की जुर्म की जुगलबंदी शिक्षा और शिक्षण संस्थानों के लिए चिंता और चुनौती की बात है। ऐसी किसी भी साज़िश से शिक्षण संस्थानों को सचेत और सावधान रहना उनका नैतिक कर्तव्य है। "वाइट कालर टेरर टायकूनों की टकसालें और सफेदपोश साज़िशी सिन्डीकेट" शान्ति, सौहार्द और सुरक्षा के खिलाफ नया रौद्र रंग-रूप है। श्री नकवी ने आगाह करते हुए कहा कि ऐसी किसी आतंकी-आपराधिक करतूत पर सांप्रदायिक सुरक्षा कवच किसी भी मुल्क-मजहब के हित में नहीं है। भारत की सुरक्षा, सम्प्रभुता और सौहार्द सुनिश्चित करना हर भारतीय का राष्ट्रीय धर्म है।
श्री नकवी ने पिछले दिनों कुछ शिक्षण संस्थानों से आतंकवादी गतिविधियों की रिपोर्ट पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि "तालीम की इमारत में तबाही की इबारत" लिखने वाले "साज़िशी संक्रमण" से सावधान रहना चाहिए। हमारे शिक्षण संस्थानों के राष्ट्रवादी आंगन को आतंकवादी अखाड़ा बनाने की कोई भी राष्ट्र विरोधी हरकत सफल नहीं होगी। श्री नकवी ने कहा कि आधुनिक तकनीक की ताकत को आतंकवादी तबाही की आफ़त बनाने वाले जल्लादी जुर्म-ज़ुल्म के ज़ालिमों को जमींदोज करना मानवता और मुल्क को सुरक्षित और सशक्त रखने के लिए ज़रूरी है।
श्री नकवी ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर करारा हमला करते हुए कहा कि जिस देश के लिए आतंकवाद उसकी राष्ट्रीय सम्पत्ति और आतंकवादी उसकी राष्ट्रीय सम्पदा बन गयी हो, वह देश आतंकवाद की सुरक्षा- संरक्षण, संवर्धन को अपना राष्ट्रीय उद्योग मान कर बैठा है।
श्री नकवी ने कहा कि "मेड इन इस्लामाबाद दहशतगर्द दरिन्दे इंसानियत-इस्लाम के वसूल और इस्लामाबाद के वजूद के दुश्मन हैं।" आतंकवाद किसी एक मुल्क, मजहब की नहीं सम्पूर्ण मानवता की मुसीबत है, दहशतगर्द दरिंदों और उसके दाताओं, आकाओं का नेस्तनाबूद होना विश्व की प्राथमिकता है। आतंकवाद पर किसी भी तरह का दोहरा मापदंड ठीक नहीं है।