वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री श्री मुख्तार अब्बास नकवी ने आज यहाँ कहा कि "मुसलमानों की भाजपा से दूरी" को "मक्कारों को मतदान की मजबूरी" मत बनने दें। आज अलीगढ़ में विभिन्न चुनावी सम्पर्क कार्यक्रमों के दौरान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफ़ेसर, समाज के प्रमुख लोगों और मीडिया से बात करते हुए श्री नकवी ने कहा कि मुसलमानों के "किसी को जिताने के जज़्बे" के बजाय "भाजपा को हराने का जुनून" साम्प्रदायिक सियासी सौदागरों के लिए सौगात साबित होता रहा है।
श्री नकवी ने कहा कि साम्प्रदायिक सियासत से मुस्लिम वोटों को "पुश्तैनी विरासत" समझने वालों की सोंच है कि "मुसलमान हमें वोट नहीं देगा तो कहां जाएगा", इस सोंच ने मुसलमानों को "वोटों के ठेकेदारों की ठगी का ठौर" बना दिया है। "साज़िशी छल की आफ़त को समावेशी बल की ताक़त" से ध्वस्त करने की जरूरत है।
श्री नकवी ने कहा कि भाजपा हिन्दुस्तान की हकीक़त है, हकीक़त को नज़रअंदाज करना, नादानी और नासमझी है। विकास के समावेशी मसौदे से वोटों के साम्प्रदायिक सौदे के हिस्ट्रीशीटर साज़िशी सिन्डीकेट के सियासी सूपड़े की सफाई में ही समाज की भलाई होगी।
श्री नकवी ने कहा कि मोदी-योगी और भाजपा ने समाज के किसी वर्ग के विकास में कमीं नहीं किया तो वोट में कन्जूसी क्यों? हम साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण नहीं समावेशी सशक्तिकरण के रास्ते को ही "सबका साथ, सबका विकास" का मंत्र मानते हैं।
श्री नकवी ने कहा कि मुस्लिम वोटों को "चिविंगम की तरह चबाने, चलता करने के चतुर चालबाजों के चक्रव्यूह से बाहर निकलने का वक्त आ गया है।"
श्री नकवी ने कहा कि भाजपा चार कदम आगे आई है, आप भी दो कदम उठाएं, "दूरियों को मजबूरियों के बन्धन से बाहर निकालें और साम्प्रदायिक छल को समझदारी के बल से परास्त करें। यही मुल्क, मानवता, मज़हब को महफूज -मज़बूत करने का मार्ग है।