वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री श्री मुख्तार अब्बास नकवी ने आज यहां कहा कि भारत के संविधान, संसद, संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ सुनियोजित दुष्प्रचार "बाई चांस नहीं, बाई च्वाईस" हो रहा है।
आज नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में श्री नकवी ने कहा कि कुछ “ट्रेडिशनल भारत विरोधी संस्थाओं” और “देश में जनादेश से जख्मी पार्टियों” द्वारा सुर में सुर मिलाकर भारत को बदनाम करने की बकवास बहादुरी "संयोग नहीं प्रयोग" है।
श्री नकवी ने कहा कि 2015 में जब 54 अफ्रीकी देशों के राष्ट्राध्यक्ष, मंत्री भारत में दुनिया के आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक मुद्दों पर चर्चा कर रहे होते हैं तो ऐसे ही लोग "अवार्ड वापसी" अभियान चलाने लगते हैं; 2020 में अमरीकी राष्ट्रपति भारत में होते हैं तो शाहीन बाग होने लगता है; और अब जब भारत जी20 की अध्यक्षता कर रहा है तो भारत के लोकतंत्र, संसदीय प्रणाली एवं देश की पारदर्शी संस्थाओं पर हमला "बाई चांस नहीं, बाई च्वाईस" हो रहा है।
श्री नकवी ने कहा कि यह डिप्रेशन "डायनेस्टी द्वारा डेमोक्रेसी को डीग्रेड करने की डींग" से ज्यादा कुछ नहीं है। दुनिया भर में बढ़ती भारत की धमक, मोदी की धाक को धक्का देने की धूर्तता वाले खुद धूलधूसरित हो रहे हैं।
श्री नकवी ने कहा कि आज भारतीय राजनीति में आए परिवर्तन से "परिवार के पालने की विरासत को पछाड़कर परिश्रम के परिणाम की सियासत में परिवर्तित हो गई है।
श्री नकवी ने कहा कि "बिना जमीन के जमींदारी, बिना जनाधार के जागीरदारी के जाबांज" इस परिवर्तन के माहौल को हजम नहीं कर पा रहे हैं।