श्री नकवी ने कहा कि "साजिशी षड्यंत्र" से "संवैधानिक जनतंत्र" को बदनाम करने में लगी लफ्फ़ाजी की लम्पट लॉबी कभी हाइड्रोजन बम का फुका गोला तो कभी हथकंडों का थका झोला लेकर, प्रजातंत्र को परिवार तंत्र का बंधक बनाने की सनक-साज़िश में लगे हैं।
श्री नकवी ने कहा कि वोट चोरी की पिटी पटकथा पर "विदेशी मॉडल का टशन" भी सत्तालोलुप सुल्तानों के मिशन को टायं टायं फिस्स होने से नहीं बचा पाया, डायनेस्टी के डिफॉल्टर डपोरशंखों की लम्पट सोंच उनकी लुटिया डुबाऊ लोच साबित हो रही है।
श्री नकवी ने कहा कि वोट चोरी के साजिशी शोर के बीच बिहार में बम्पर वोटिंग ने साबित कर दिया कि सुनियोजित साजिशों का भौकाल चुनावी चौपाल पर चारों खाने चित हुआ, मतदान के प्रति लोगों को हतोत्साहित करने की आपराधिक अराजकता नाकाम हो गई है। जनता की बम्पर वोटिंग, जनतंत्र की बम्पर विक्ट्री का संदेश है।
श्री नकवी ने विपक्षी गठबंधन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि 'कौड़ी का ठिकाना नहीं, करोड़ों की ठिठौली में लगा झूठ और झांसे के झुंड की झालर में शार्ट सर्किट हो चुका है, चुनाव में बीजेपी से फाइट से अधिक फ्रेंडली फाइट में डटे हैं।
श्री नकवी ने कहा कि गठबंधन सामन्ती सनक से नहीं सियासी समझ से सफल होता है, सामन्ती सियासत के सत्तालोलुप सुल्तानों को समझना होगा सरकार सामन्ती टशन से नहीं सुशासन के मिशन से बनती चलती है, सत्ता जन्मसिद्ध अधिकार नहीं जनादेश का उपहार होता है, जिसे किसी सामंती सियासत, सुल्तानी विरासत का मोहताज और मातहत नहीं बनाया जा सकता।
श्री नकवी ने कहा कि घमंडिया घरानों के घोंचूं घनचक्करों की धाराप्रवाह धूर्तता ने कांग्रेस को 'घर से घरौंदे, घरौंदे से घोंसले, घोंसले से घोंचू का चोचला बना दिया है। हिट एन्ड रन के खेल में कांग्रेस तो हिट विकेट हो रही है साथ ही अपने साथियों को भी बिना रन के रन आउट करा रही है और बाउंड्री के बाहर से गाना गा रही है, "हम तो डूबे हैं सनम, तुमको भी ले डूबेंगे।"
श्री नकवी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी सत्ताइस के चुनावी समर में सत्तालोलुप सुल्तानों का सुरूर और गुरूर फिर एक बार चकनाचूर होगा और भाजपा का सुशासन सफर आगे बढ़ता रहेगा, मुसलमानों को भी भाजपा हराओ रिवाज, मिज़ाज पर आत्मचिंतन करना होगा, वरना भाजपा से दूरी को छद्म सेक्युलर सिंडिकेट मुसलमानों की मजबूती बना उनका राजनैतिक शोषण करते रहेंगे। भाजपा के प्रति अस्पृश्यता के रिवाज के बजाय अंतरात्मा के मिज़ाज से चुनाव में अपने मताधिकार की ताक़त का इस्तेमाल करना मुल्क और मुसलमानों के लिए वक्त की ज़रूरत है, अपने वोटों को वोट के सौदागरों की सम्पति नहीं, बल्कि अपने सम्मान, समृद्धि, सशक्तिकरण की सम्पत्ति बनाना होगा।